
Assam असम: ऑल इंडिया रेडियो (AIR) की जानी-मानी न्यूज़रीडर और असमिया ब्रॉडकास्टिंग की प्रतिष्ठित आवाज़ों में शामिल लिली दास मलिक का निधन हो गया है। उन्होंने रविवार, 3 मई को रात 8:15 बजे बेंगलुरु में अंतिम सांस ली। वह 90 वर्ष की थीं। उनके निधन की खबर से मीडिया जगत और रेडियो प्रसारण क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।
लिली दास मलिक को ऑल इंडिया रेडियो की पहली असमिया महिला न्यूज़रीडर होने का गौरव प्राप्त था। उन्होंने असमिया रेडियो पत्रकारिता और सार्वजनिक प्रसारण के क्षेत्र में लंबे समय तक महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी आवाज़ दशकों तक असमिया रेडियो समाचारों की पहचान बनी रही और कई पीढ़ियों ने उन्हें समाचार पढ़ते हुए सुना।
रेडियो प्रसारण के स्वर्णिम दौर में जब ऑल इंडिया रेडियो ही सूचना और समाचार का प्रमुख माध्यम हुआ करता था, तब लिली दास मलिक की आवाज़ ने श्रोताओं के बीच एक अलग पहचान बनाई। उनकी स्पष्ट और प्रभावशाली प्रस्तुति शैली ने उन्हें उस समय की सबसे भरोसेमंद आवाज़ों में शामिल कर दिया।
उन्हें असमिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की एक पायनियर के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने उस दौर में काम किया जब महिलाओं की भागीदारी मीडिया और ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र में सीमित थी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर एक मजबूत पहचान बनाई।
अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने रेडियो समाचार प्रसारण में कई बदलावों और विकास के दौर को देखा और उसमें सक्रिय भूमिका निभाई। हालांकि, अपनी पेशेवर उपलब्धियों के बावजूद उन्होंने टेलीविजन मीडिया से दूरी बनाए रखी और अधिकतर रेडियो प्रसारण तक ही सीमित रहीं।
लिली दास मलिक का जीवन असमिया भाषा और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी आवाज़ ने न केवल समाचारों को लोगों तक पहुंचाया, बल्कि एक भरोसेमंद सूचना स्रोत के रूप में रेडियो की भूमिका को भी मजबूत किया।
उनके निधन के बाद मीडिया जगत के कई वरिष्ठ पत्रकारों, पूर्व सहकर्मियों और श्रोताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। लोगों ने उन्हें असमिया पत्रकारिता और ब्रॉडकास्टिंग की एक प्रेरणादायक शख्सियत बताया, जिन्होंने अपने समय में कई सीमाओं को पार कर महिलाओं के लिए एक नई राह बनाई।
उनके योगदान को याद करते हुए कई लोगों ने कहा कि लिली दास मलिक की आवाज़ हमेशा असमिया रेडियो इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेगी। उनका जाना न केवल एक व्यक्ति का निधन है, बल्कि एक पूरे युग का अंत माना जा रहा है।





